अभी मैंने सुना एक अभिनेता किसी स्टेशन पर आया और उसे देखने में इतनी भीड़ हुई के एक आदमी भीड़ में दम घुटने से मर गया| बड़े दुःख की बात, पर अब किसी को दोषी भी नहीं ठहरा सकते| पर समझ में ये नहीं आता के ऐसा हुआ क्यों| भारतीयों में इतना क्रेज़ एक अभिनेता को देखने का, इतनी इज़्ज़त| फिर तो भय्या बेकार है इंजीनियर डॉक्टर बनना, सबको एक्टर ही बनना चाहिए, कमसे कम पूछे तो जाओगे अगर एक्टिंग वेक्टिंग थोड़ी कम भी आती होगी तब भी दो चार बार माइक वाइक में बोलने और टीवी में इंटरव्यू देने का मौका तो मिल ही जाएगा| और जब टीवी में आने लग जाओगे फिर तो बस तुम ही तुम हो, आपने ज़िन्दगी में जो भी मेहनत की होगी उसे टीवी पर बताना, की हम छोटे से घर में रहते थे, ऐसा करते थे वैसा करते थे| फिर देखो दर्शको के आंसू ऐसे टपा टप बहेंगे तुम्हारे लिए, जैसे दुनिया में कोई और तो मेहनत करके जीता ही नहीं, बाकी सब मौज से रहते हैं|
चलो चैनलो पर कुछ भी चले, मुझे किसी से कोई दिक्कत नहीं है, बस जज़्बातो के बाज़ारीकरण होने से दिक्कत है| आखिरकार सिर्फ जो ये सो कॉल्ड इज़्ज़तदार प्रोफेशन हैं जैसे फिल्म, क्रिकेट वगेरा, इसके अलावा भी ज़िन्दगी है, इसके अलावा भी लोग काम करते हैं, कोई प्रोजेक्ट बनाता है, कोई आविष्कार करता है, कोई डॉक्टर अजूबा करके किसी की जान बचा लेता है, किसी टीचर के सबसे ज़्यादा स्टूडेंट पास हुए होते हैं, किसीने कोई पुल बहुत अच्छा बनाया होता है| तो उन लोगो को भी एक आद बार टीवी वालो को दिखा देना चाहिए, कोई एपिसोड बना देना चाहिए| नहीं तो हम जैसे गरीब लोग तो कोई एक्टर के आने पे जब भीड़ लगेगी तो भीड़ में से बस उसे ही उचक उचक के देखते रह जायेगे, चाहे पीछे से कोई महान इंसान ही निकल के चला जा रहा हो|


मैं ये मानता हूँ की टीवी मनोरंजन के साथ साथ एक ज़िम्मेदारी का प्रोफेशन भी है, हम क्या दिखा रहे हैं वैसी ही हमारी जेनेरशन बनेगी, उनमे वैसी ही प्रेरणा आएगी| क्योंकि इज़्ज़त और हुनर तो दुसरे प्रोफेशन के लोगो में भी होता है, नहीं तो वो सारी उम्र अपने प्रोफेशन को देकर, नए नए ईजाद कर भी, जब चका-चौंध में खुद को कही नहीं पाएंगे तो खुद को ठगा महसूस करेंगे और अपने बच्चो को ले लेकर निकलेंगे मॉडल या एक्टर बनाने और ठगते फिरेंगे इधर उधर चका चौंध के ठेकेदारो से|

लोगो को इस हद्द तक जागरूक और पढ़ा लिखा करना पड़ेगा की वो फिर बिना मतलब किसी के महिमा मंडन में न लगे रहे, चाहे वो कोई नेता हो या अभिनेता| न किसी भागती हुई भीड़ में बिना जाने पूछे बस घुसने बड़ने का होड़ करेंगे| जहां तक मुझे लगता है ऐसे देशो में जहां अधिकतर लोग जागरूक और किसी न किसी प्रगतिशील गतिविधि में लगे रहते हैं, वे अपने बहुचर्चित राष्ट्रपति के आने पर भी हल्ला गुल्ला नहीं मचाते बस शांत खड़े हो देखकर हाथ वगैरा मिलाकर निकल लेते हैं| मेरा एक सपना है की अपना देश ऐसा हो के जहां व्यक्ति पूजा के बदले कर्म पूजा हो, और सभी अपनी अपनी जगह खुश हों|

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